Defence Stock : शेयर बाजार में कभी-कभी ऐसी कहानियां बनती हैं जो किसी फिल्म की कहानी से कम नहीं होतीं। 2025 में एक ऐसा ही चमत्कार हुआ, जिसने बाजार में हर किसी का ध्यान अपनी ओर खींच लिया। बात हो रही है Swan Defence and Heavy Industries Ltd. की, जो कभी महज 1 रुपये का शेयर था और कुछ ही महीनों में 1,388 रुपये तक पहुंच गया।
जुलाई 2025 में जब यह शेयर सिर्फ 1 रुपये के करीब कारोबार कर रहा था, तब मुश्किल से कुछ निवेशकों को यकीन था कि यह कंपनी कभी इतनी ऊंचाइयों को छू सकती है। उस समय कंपनी के पास भारी कर्ज था, घाटा बढ़ रहा था और नकदी की स्थिति भी कमजोर थी। लेकिन बाजार की कहानियां अक्सर उम्मीद और बदलाव की नींव पर बनती हैं।
कंपनी का नाम और पहचान बदली
Swan Defence and Heavy Industries Ltd. का पुराना नाम Reliance Naval था। यह कंपनी भारत के सबसे बड़े शिपयार्ड्स में से एक की मालिक है, जो गुजरात के पीपावाव में स्थित है। कंपनी के पास देश की लगभग 30 प्रतिशत शिपबिल्डिंग कैपेसिटी है। यहां सिर्फ जहाज नहीं बनते बल्कि नेवी और कोस्ट गार्ड के जहाजों की मरम्मत और रिफिटिंग का काम भी होता है।
यही नहीं, ऑफशोर प्रोजेक्ट्स और हेवी फैब्रिकेशन का काम भी इस कंपनी का हिस्सा है। कंपनी की जमीन पर मौजूद इंफ्रास्ट्रक्चर हमेशा से मजबूत रहा है, लेकिन निवेशकों का भरोसा खो गया था। फिर 2025 की दूसरी छमाही में खबरें आने लगीं जिन्होंने पूरी तस्वीर बदल दी।
खबरों ने बदल दिया रुख
अगस्त 2025 में कंपनी ने एक इंटरनेशनल टेक फर्म के साथ एमओयू साइन किया। इसके बाद सितंबर में गुजरात मैरीटाइम बोर्ड के साथ 4,250 करोड़ रुपये का बड़ा एमओयू सामने आया, जिसमें शिपयार्ड एक्सपेंशन और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस जैसी योजनाएं शामिल थीं। नवंबर आते-आते कंपनी को यूरोप की एक शिपिंग कंपनी से छह केमिकल टैंकर बनाने का ऑर्डर मिला और साथ ही 750 करोड़ रुपये जुटाने के लिए QIP लाने की योजना बनी।
इन सब खबरों ने बाजार में यह विश्वास जगाया कि यह कंपनी अब अतीत की परेशानियों में फंसी नहीं है, बल्कि भविष्य की ओर बढ़ रही है। इसके बाद शेयर ने ऐसी उड़ान भरी जिसकी कल्पना भी किसी ने नहीं की थी।
रफ्तार तेज लेकिन चुनौतियां बरकरार
दिसंबर 2025 में Swan Defence का शेयर 1,388 रुपये के ऊपरी सर्किट पर पहुंच गया और इसका मार्केट कैप करीब 7,300 करोड़ रुपये हो गया। लेकिन कंपनी की असली कहानी अभी अधूरी है। FY26 की पहली छमाही में कंपनी का रेवेन्यू सिर्फ 63 करोड़ रुपये रहा जबकि घाटा 50 करोड़ रुपये से ज्यादा का है।
कर्ज का बोझ अभी भी करीब 2,540 करोड़ रुपये है और ऑपरेटिंग कैश फ्लो निगेटिव बना हुआ है। बाजार में विश्वास और उम्मीद की ताकत से यह कंपनी आज सुर्खियों में है, लेकिन असली परख आने वाले समय में होगी।
डिस्क्लेमर: यहां पर दी गई जानकारी कोई भी निवेश सलाह नहीं है। निवेशक शेयर बाजार में निवेश करने से पहले अपने वित्तीय सलाहकार से राय जरूर लें और अपनी जिम्मेदारी पर ही निवेश करें।